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शिमला में SFI और भाजपा कार्यकर्ताओं की झड़प, पुलिस ने संभाले हालात

शिमला में SFI और BJP कार्यकर्ताओं की झड़प, डीसी ऑफिस के बाहर बढ़ा तनाव; कांग्रेस भी करेगी भाजपा मुख्यालय का घेराव

डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन के दौरान SFI और भाजपा कार्यकर्ताओं में हुई धक्कामुक्की

पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया, हालात पर पाया काबू

दिल्ली छात्र आंदोलन और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर शिमला में बढ़ी सियासी हलचल


हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मंगलवार दोपहर उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता डीसी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन के दौरान आमने-सामने आ गए। दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और धक्कामुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि मौके पर तैनात पुलिस बल ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों को अलग कर दिया, जिससे किसी बड़े टकराव की नौबत नहीं आई।

जानकारी के अनुसार, SFI और भाजपा अलग-अलग मुद्दों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन के लिए डीसी कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के करीब आ गए और तीखी नारेबाजी शुरू हो गई। कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया तथा धक्कामुक्की की स्थिति बन गई।

मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों और जवानों ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग कर दिया। पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर प्रदर्शनकारियों को एक-दूसरे के संपर्क में आने से रोका। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई और कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।

SFI कार्यकर्ता दिल्ली में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। संगठन का आरोप है कि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। उनका कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।

वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन को लोकतांत्रिक मर्यादाओं, संवैधानिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ बताया। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस के 118 से अधिक जवान घायल हुए। उन्होंने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की।

घटना के बाद डीसी कार्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई। पुलिस ने दोनों संगठनों के प्रदर्शन को अलग-अलग स्थानों पर जारी रखने की व्यवस्था बनाई, ताकि किसी तरह की दोबारा टकराव की स्थिति न बने। कुछ समय तक इलाके में तनाव बना रहा, लेकिन बाद में हालात पूरी तरह सामान्य हो गए।

इस बीच राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता भी केंद्र सरकार के विरोध में शिमला स्थित भाजपा मुख्यालय दीपकमल के बाहर प्रदर्शन और धरना देने की तैयारी में हैं। ऐसे में राजधानी शिमला में राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना जताई जा रही है।